बैकुंठाज्जनिता वरा मधुपुरी तत्रापि रसोत्सवद
वृन्दरण्यमुदारपणि रमनातत्रापि गोवर्धन:।
राधाकुंडमिहापि गोकुलपते: प्रेमामृत - प्लावनत
कुर्यादस्य विराजतो गिरितटे सेवाँ विवेकि न के:।।
(श्री रूपगोस्वामी)
श्री वैकुण्ठधाम से मथुरा - पुरी श्रेष्ठ है । मथुरा से श्री वृन्दावन श्रेष्ठ है, क्योकि उसमे रासमहोत्सव होता है। उसमें फिर गिर्राज श्री गोवर्धन सर्वश्रेष्ठ है, क्योकि निरंतर सात दिनों तक श्री गोवर्धन श्री कृष्ण के हस्तकमल पर विराजमान रहा है अथवा श्री राधाकृष्ण का नित्य
केलि-वास श्री गोवर्धन में सम्पन्न होता है । उसमे भी श्री राधाकुंड श्रेष्ठ है, क्योंकि यह गोकुलपति श्री वृजनन्दन को प्रेमामृत में प्लावित करता रहता है अतः ऐसा कौन विवेकि व्यक्ति होगा जो गिर्राज श्री गोवर्द्धन तट में विराजमान इस श्री राधाकुंड का सेवन नही करेगा? अथार्त समस्त भजन कुशल विवेकीजन इस श्री राधाकुंड का दर्शन,स्नान,पूजन,सेवनादि करते हुए इसके तट पर निवास करते है।
~दीपक लवानियां
I love radha kund
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