★मानसी गंगा★
गंगे दुग्धमये देवि भगवनमानसोदभवै:।
नम: कैवल्यरूपाढयै मुक्तिदै भुक्तिभागिनी।।
इति मंत्रं शतावृतयामज्जनाचमनैर्नमन ।
ब्रह्महत्यादि पापानि नश्यन्ति नात्र संशय।।
वृषहत्याप्रधातु विमक्तो देवकीसुत:।।
गिरराज गोवर्धन के हृदय पटल पर स्थित मानसी गंगा ब्रज भूूमि का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में तीर्थयात्री इस पवित्र सरोवर में आचमन एवं स्नान के लिए आते है। गिर्राज जी की परिक्रमा तब तक पूर्ण नही मानी जाती जब तक मानसी गंगा के पवित्र जल का आचमन तथा स्न्नान न कर लिया जाए । ब्रज में इस सरोवर का महत्व गंगा के समान ही है । मानसी गंगा के बारे में यह लोक विख्यात है कि यह सरोवर किसी व्यक्ति के द्वारा निर्मित नही किया गया बल्कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने मन की कल्पना मात्र से ही उत्पन्न किया है।
गोपिका वचनेनापि कृष्णस्तु मनसाकरोत।
वृषहत्या पराधस्य मुक्तये मानसी शुभम।।
ब्रजगोपियो के वचनों के अनुरूप श्री कृष्ण ने वृषभासुर रूप (गौ) की हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए अपने मानस से उत्पन्न किया। क्योंकि चरणोदक गंगा में स्नान करके भगवान कैसे पापमुक्त हो सकते थे । इसलिए इसे अपने मानस से प्रकट कर स्वयं स्नान किया। अतः इसे पाप विनाशिनी कहते है । कहा जाता है जो व्यक्ति इसमे स्नान करता है वह समस्त पापमुक्त होकर गोलोक धाम को प्राप्त करता है।
~दीपक लवानियां