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Wednesday, 22 July 2020

पूँछरी का लौठा (पूँछरी गांव)

पूँछरी का लौठा~

आन्यौर गांव से 3 km दक्षिण दिशा में पूँछरी गांव स्थित है। पूँछरी नाम का प्रथम कारण - श्री गिर्राज जी की आकृति मयुराक्रति है। राधाकुंड एवं श्यामकुण्ड उनके दो आंख एवं यह भाग मोर की पूंछ की तरह होने के कारण पूँछरी पड़ा। दूसरा कारण - श्री गिर्राज जी की आकृति गौ रूप है। इस आकृति में राधाकुंड में गिरराज जी जिव्हा गोपकुआ में से प्रकट हो कर राधाकुंड श्री गोविन्द मंदिर में विराजित है तथा मुकुट गोवर्धन में है और पूँछ पूँछरी में है। इस कारण इस गांव का नाम पूँछरी पड़ा। परिक्रमा मार्ग पर गांव में श्री कृष्ण - बलराम मंदिर विराजित है। गांव के पश्चिम भाग में श्री लौठा जी का मंदिर दर्शनीय है। 


श्री लौठा जी संबंधित एक कथा - श्री लौठा जी नाम के श्री कृष्ण के एक मित्र थे। द्वारका गमन समय श्री कृष्ण ने लौठा जी को अपने साथ चलने का अनुरोध किया। इसपर लौठा जी बोले - है प्रिय सखा ! मेरी ब्रज त्यागने की कोई इच्छा नही है। परंतु तुम्हारे ब्रज त्यागने का मुझे अत्यंत दुख है।  अतः तुम्हारे पुनः ब्रजगमन न होने तक मे अन्न जल इत्यादि परित्याग कर भजनविस्ट हुए। तभी से पूँछरी स्थित जिस स्थान पर बैठ श्री लौठा जी भजनाविस्ट हुए थे वह स्थान पूँछरी के लौठा के नाम से प्रसिद्ध है। श्री लौठा जी मन्दिर के पास अप्सराकुण्ड  एवं नावलकुण्ड स्थित है। देवराज इंद्र ने जब श्री कृष्ण का अभिषेक किया तब स्वर्ग से अप्सराएं आगमन कर इस स्थान पर नृत्य किया । इस कारण इस कुंड का नाम अपसरा कुंड हुआ। इस कुंड में स्नान करने से अप्सरा सम देह प्राप्त होती है। इसके पास नवलकुण्ड स्थित है। इस कुण्ड का प्राचीन नाम पूँछकुण्ड था। भरतपुर राजा की महारानी का नाम  नवलरानी था । उन्होंने अप्सराकुण्ड एवं नवलकुण्ड का पक्का निर्माण कराया था। उन्ही के नाम पर इसका नाम नवलकुण्ड हो गया। इस कुण्ड का जलपान करने से श्री कृष्ण चरणामृत पान लाभ एवं स्नान से मुक्ति पद लाभ होता है। कुंड के पूर्व तट पर नरसिंह देव जी का मंदिर है । अप्सराकुण्ड के पश्चिम तट पर श्री अप्सरा बिहारी जी का मंदिर आदि दर्शनीय है।

                                            ~दीपक लवानियां

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