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Monday, 20 July 2020

चक्रतीर्थ/चकलेश्वर महादेव (गोवर्धन)

चक्रतीर्थ/चकलेश्वर महादेव~
चक्रतीर्थ का वर्तमान नाम चकलेश्वर है। यह गोवर्धनस्थ: मानसी गंगा के उत्तर तट पर स्थित है।इस स्थान पर चकलेश्वर महादेव, श्री मनमहाप्रभु जी का मंदिर एवं श्री पाद सनातनदास गोस्वामी की भजन कुटीर है। भगवान श्री कृष्ण ने जब श्री गिरी गोवर्द्धन को धारण किया था तो उनके आदेशानुसार सुदर्शन चक्र, इंद्र द्वारा प्रवाहित वर्षा जल को अपनी ओर आकर्षित कर शोषण करने लगा। सात दिनों तक भीषण वर्षा उपरांत भी जब ब्रजवासियों को किसी प्रकार ख्यति न कर पाए तो देवराज इंद्र वर्षा बन्द कर श्री कृष्ण से क्षमा प्रार्थना करने लगे। वर्षा समाप्त होने पर इस स्थान पर सुदर्शन चक्र आकार श्री कृष्ण (श्री नारायण) के हस्त में स्थित हुआ। इस कारण इस स्थान का नाम चक्रेस्वर पड़ा।प्राचीन काल मे इस स्थान पर श्री महादेव जी का मंदिर दर्शनीय था। एवं सुदर्शन चक्र श्री नारायण के हस्त पुनः स्थित हुआ इन दोनों कारणों से इस स्थान का नाम चकलेश्वर महादेव हुआ।

श्री कृष्ण द्वारा चक्रतीर्थ में श्री पाद सनातन दास गोस्वामी पर कृपा~

श्री पाद सनातन गोस्वामी जब इस स्थान (चकलेश्वर) पर वास करते थे। तो अपनी वर्द्धवस्था के कारण श्री गिर्राज जी की परिक्रमा करने में असमर्थ थे। एक दिन भगवान श्री कृष्ण एक बालक का रूप धारण कर उनके निकट आ बोले~ "हे बाबा! तुम अति वृद्ध हो इस कारण श्री गिर्राज परिक्रमा करने में असमर्थ हो अतः मैं गिर्राज पर्वत से एक श्री कृष्ण के चरण चिन्ह युक्त श्री गिर्राज शिला खण्ड लाया हूं। तुम इसकी परिक्रमा करो। इससे तुम्हारी श्री गिर्राज परिक्रमा पूर्ण होगी"। यह बोलकर बालक शिला खण्ड दे कर अन्तरध्यान हो गए। अतः  गोस्वामी जी उस बालक को न देख, बालक रूपी श्री कृष्ण के छल को समझ गए। तभी से वे नित्य उस श्री गिर्राज शिला खण्ड की परिक्रमा करने लगे । वर्तमान में यह शिला खण्ड व्रन्दावन स्थित श्री राधादामोदर मन्दिर में दर्शनीय है।
                                            ~दीपक लवानियां

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